Hanuman Chalisa in Hindi PDF (हनुमान चालीसा सम्पूर्ण पाठ)

हनुमान जी की भक्ति करने का आनंद ही कुछ अलग होता है। यह आपके मन को शांत करता है। आज हम hanuman chalisa in hindi pdf की चर्चा करेंगे।

इसके साथ ही हम आपको hanuman chalisa in hindi pdf download लिंक भी प्रदान करेंगे जिससे आप हनुमान चालीसा डाउनलोड कर पढ़ सकते है।

हनुमान चालीसा, हिंदू धर्म की एक अत्यंत महत्वपूर्ण पूजा पाठ है जो हमें भगवान हनुमान के भक्ति और उनके गुणों के महत्व को समझाता है। यह एक प्राचीन पाठ है जो प्रख्यात संत तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया था।

इस प्रेरणादायक चालीसा के जरिए, हम अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए उन्हें अपना सकते हैं और आत्मानुभूति की ओर अग्रसर हो सकते हैं। इस लेख में, हम हनुमान चालीसा के महत्वपूर्ण सिद्धांतों और संदेशों को समझेंगे, और इसके आध्यात्मिक अर्थ को गहराई से विश्लेषण करेंगे।

चलिए जय श्री राम का नाम लेते है और आज का यह ज्ञान से भरपूर ब्लॉग सुरु करते है इसमें हम आपको hanuman chalisa meaning in hindi भी प्रदान करेंगे।

इससे आपको यह पाठ समझने में आसानी मिले। ज्यादा समय ज़ाया ना करते हुए सुरु करते है आज का ब्लॉग।

Hanuman Chalisa History (ऐतिहासिक पृष्ठभूमि)

हनुमान चालीसा को समझने के लिए, हमें इसके पिछले समय के संदर्भ को समझना महत्वपूर्ण है। इसे प्रसिद्ध संत तुलसीदास जी ने 16वीं सदी में लिखा था। उस समय, भारत में आध्यात्मिक जागरूकता का एक महत्वपूर्ण क्षण था, और लोग धर्म के माध्यम से जीवन के असली अर्थ को खोज रहे थे।

तुलसीदास जी, जो रामायण के प्रभाव में गहरे प्रभावित थे, ने हनुमान जी की महानता को समझाने और उनकी भक्ति को महत्वपूर्ण बनाने के लिए इस चालीसा को लिखा।

हनुमान चालीसा में, हनुमान जी के गुणों का उपदेश है। इसमें उनकी वीरता, उनका साहस और उनका विश्वास का प्रतिकात्मक वर्णन है। यहाँ तक कि एक साधारण व्यक्ति भी हनुमान चालीसा का पाठ करके अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकता है और अपने जीवन के मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर सकता है।

हनुमान चालीसा के संदेश आज भी हमें अपने जीवन के महत्वपूर्ण मुद्दों को समझाते हैं। इसमें समय के साथ समाज में बदलाव आये होते हैं, लेकिन हर एक व्यक्ति के जीवन में इसके मूल सिद्धांतों की आवश्यकता होती है।

हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से हमें आत्मशांति और सफलता की प्राप्ति होती है। यह एक प्राचीन प्रथा है जो अब भी बहुत से लोगों के द्वारा पाली जाती है।

Hanuman Chalisa lyrics in Hindi PDF

क्या आपको पता है यदि आप रोज़ाना हनुमान चालीसा का पाठ करते है तो यह आपके जीवन के लिए काफी लाभकारी हो सकता है। जीवन से जुडी परेशानी भगवन हनुमान के नाम मात्र से दूर हो जाते है।

अब आगे बढ़ते है तो जानते है hanuman chalisa lyrics meaning in hindi। यहाँ पर आपको hanuman chalisa lyrics और उसके साथ साथ उसका meaning hindi में जानने को मिलेगा।

श्रीगुरु चरण सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

(मैं अपने मन को गुरु के चरणों के धूल समझकर सुधारता हूँ। इससे अपने मन को शुद्ध करता हूँ। मैं उस श्रीराम का सत्कार करता हूँ, जिनके गुण बहुत शुद्ध हैं और जिनसे चारों धरती पर सुख-शांति होती है।)

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश बिकार॥

(मैं वहाँ उस हनुमान को ध्यान में लेता हूं, जिनके प्रभाव से बुद्धिहीन शरीर भी ज्ञानी बन जाता है। हे हनुमान, आप मुझे शक्ति, बुद्धि, और विद्या दे, और सभी कलेश और दुःख को नष्ट करें।)

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीश तिहुँ लोक उजागर॥

(जय हो हनुमान, आप ज्ञान और गुणों का समुद्र हैं। आपके गुणों को नमन है। जय हो कपिश्रेष्ठ, आप तीनों लोकों में जगमगाहट फैलाते हैं, आपकी महिमा सब जगह फैली है।)

रामदूत अतुलित बलधामा।
अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

(हे हनुमान, आप राम के प्रतिनिधि हैं और आपकी शक्ति अतुलनीय है। आप अंजनी माता के पुत्र हैं और आपका नाम पवनपुत्र हनुमान है।)

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥

(हे हनुमान, आप महान वीर हैं और आपका बल अतुलनीय है। आपका वीरत्व अद्वितीय है। आप बुरे मन को दूर करने वाले हैं और अच्छे विचारों के संगी हैं। आप जिनके साथ बुद्धिमान लोग रहते हैं।)

कञ्चन बरन विराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुञ्चित केसा॥

(हे हनुमान, आपका शरीर सोने के समान चमकता है और आपकी श्रीमुख बहुत प्रसन्नता से भरा हुआ है। आपके कानों में कुण्डल और बाल गुच्छित हैं, जो आपके चेहरे को और भी आकर्षक बनाते हैं।)

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥

(हे हनुमान, आपके हाथ में वज्र और ध्वजा (झंडा) उज्ज्वलता है। आपके हाथों में शक्ति और योग्यता है। आपके कंधों पर मूंज (संगमरमर) का जनेऊ धारण किया है, जो आपकी उच्च विद्या और धर्म को दर्शाता है।)

शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन॥

(हे हनुमान, आप शंकर जी के पुत्र और केसरी नंदन (महावीर हनुमान) हैं। आपकी वीरता और प्रताप (महत्त्व) को समझकर पूरा जगत् आपका सम्मान करता है। आपका तेज और प्रभाव पूरे विश्व में विस्तारित है।)

विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥

(हे हनुमान, आप बहुत ही विद्यावान, गुणी और अत्यंत चतुर हैं। आपका ज्ञान और बुद्धिमत्ता अत्यधिक है। आप राम के कार्य को करने के लिए बेहद उत्सुक हैं। आपको राम की सेवा करने में बहुत आनंद मिलता है।)

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥

(हे हनुमान, आपको भगवान राम के चरित्र का सुनना अत्यधिक आनंददायक है। राम, लक्ष्मण और सीता के चित्त में बसने वाले हैं। आपका मन उनके भगवान राम, लक्ष्मण और सीता में विश्वास करता है।)

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा॥

(हे हनुमान, आपने सीता माता के पास छोटे रूप में जाकर उन्हें दर्शन दिया। आपने लंका में बड़े और भयंकर रूप में प्रवेश किया और वहाँ का विनाश किया।)

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे॥

(हे हनुमान, आपने भयंकर रूप धारण करके असुरों का संहार किया। आपने भगवान रामचंद्र के कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया। आपने राम के सारे कामों को सजीव किया।)

लाय सजीवन लखन जियाए।
श्रीरघुवीर हरषि उर लाए॥

(हे हनुमान, आपने सजीवनी बूटी लेकर लक्ष्मण को जीवंत किया। भगवान राम के वीर हनुमान, जो लक्ष्मण को जीवंत किया, उनके मन में बड़ा आनंद भरा।)

रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

(भगवान राम ने आपको बहुत प्रशंसा की है। आप मेरे प्रिय भाई भरत के समान हैं। (भरत, भगवान राम के भाई थे)।)

सहस बदन तुम्हरो जस गावै।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥

(अनगिनत शरीरधारी हनुमान, तुम्हारी प्रशंसा करते हैं। इस प्रकार श्रीराम कहते हुए तुम्हारा आशीर्वाद प्राप्त हो। (“अस” शब्द का अर्थ है “श्रीराम” या “ईश्वर”)।)

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥

(सनकादि ऋषियों सहित ब्रह्मा आदि चारों मुनियों का। साथ में नारद और सारद, सभी विद्वान् ऋषियों का। नारद मुनि के साथ सहित अहीसा, यानि सभी विद्वान् मुनियों का समुदाय।)

यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सकैं कहाँ ते॥

(वहाँ, जहाँ यमराज, कुबेर और दिग्गज दिगपाल हैं। (यमराज – मृत्यु का देवता, कुबेर – धन का देवता, दिग्गज दिगपाल – चारों दिशाओं के रक्षक देवता)| कवि और विद्वान् कहाँ से उस जगह का वर्णन कर सकते हैं? उनके शब्दों में वह जगह कैसे वर्णित हो सकती है? वह स्थान कहीं से नहीं समझा जा सकता।)

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राजपद दीन्हा॥

(तुमने सुग्रीव का उपकार किया। (सुग्रीव भगवान राम के मित्र थे जिन्होंने हनुमान की मदद से भगवान राम से मिलन की अनुमति प्राप्त की थी।) तुमने भगवान राम के लिए उनकी पत्नी सीता को खोजकर उन्हें मिला दिया और उन्हें अयोध्या में राजपद दिया। (राम मिलाने के बाद भगवान राम ने सुग्रीव को किष्किंधा की राजधानी दी)।)

तुम्हरो मन्त्र विभीषण माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥

(विभीषण ने आपका मंत्र माना। (विभीषण रावण के भाई थे जिन्होंने हनुमान जी की सलाह सुनी और उनका समर्थन किया था।), लंका के भगवान (रावण) हनुमान के मंत्र का समर्थन करते हुए उनका शिष्य बन गए और इसकी सारी दुनिया को जानकारी हो गई।)

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

(जहाँ हजारों युगों तक चमकता है, जैसे कि सूर्य। उसने वहाँ खेलना शुरू किया, जहाँ सबसे मीठे फल होते हैं, जैसे कि बजरंगी हनुमान ने सीता माता को लंका से उसके प्रिय फल, अर्थात जिसका स्वाद बहुत ही मधुर होता है, लाने के लिए जाना।)

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥

(हे प्रभु, जब आपकी मुद्रा को मुख में रखते हैं। तब समुद्र को पार करने में हैरानी की कोई बात नहीं होती। (हनुमान जी ने लंका तक समुद्र को पार किया था, लेकिन उस समय उसने अपनी बौद्धिक शक्ति का प्रदर्शन किया था, इसलिए यह कहा गया है कि वह अचरज नहीं होता)।)

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

(हे हनुमानजी, आप सभी दुर्गम कार्यों को सहजता से पूरा कर देते हैं, जो सम्पूर्ण जगत् के लिए अत्यंत कठिन होते हैं। आपका कृपाशील आशीर्वाद सभी को सुगम (सहज) बना देता है, और आपके कृपाशीलता से सभी कार्य सहजता से हो जाते हैं।)

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

(हे हनुमान, तुम रामचंद्रजी के द्वारपाल हो। बिना उनके आदेश के कुछ भी नहीं हो सकता। (“पैसारे” का अर्थ है “बिना कुछ मांगे” या “बिना कुछ खोजे”)। इसका अर्थ है कि तुम उनके आदेश के बिना कुछ नहीं कर सकते।)

सब सुख लहैं तुम्हारी शरणा।
तुम रक्षक काहू को डर ना॥

(सभी सुख तुम्हारे शरण में हैं। यानी, जो भी सुख मिलते हैं, वे सभी तुम्हारी शरणा में ही हैं। तुम रक्षक हो, तुम्हें किसी से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। यानी, किसी भी भय का सामना करने की जरुरत नहीं है, क्योंकि तुम हर किसी को सुरक्षित रख सकते हो।)

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक ते कांपै॥

(आप ही अपनी ओर से अपनी विशाल शक्ति को नियंत्रित करते हैं। आपकी शक्ति से तीनों लोकों (स्वर्ग, मर्त्यलोक, पाताल) कांप जाते हैं। यहाँ “हांक” का अर्थ होता है डर से काँपना या थरथराना। इस वर्षा से, भय और उन्हें जो आपकी भयंकर शक्ति को देखकर उनका कांपना है।)

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥

(भूत और पिशाच आपके पास नहीं आते। जब आपका नाम, अर्थात ‘हनुमान’, सुनाया जाता है, तब आपकी महानता दिखाई देती है। यहाँ ‘महाबीर’ का अर्थ ‘महान वीर’ होता है, जिसका नाम सुनते ही भूत-पिशाच भग जाते हैं।)

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

(हे हनुमानजी, आपके जप से सभी रोग और पीड़ा नष्ट हो जाती है। हे हनुमानजी, आपके जप को निरंतर करने से, हनुमानजी का वीर्य या शक्ति बढ़ती है। यहाँ ‘बीरा’ का अर्थ ‘बहादुर’ या ‘वीर’ है, जो आपके जप करने वाले को बनाता है।)

संकट तें हनुमान छुडावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥

(हे हनुमानजी, आप ही हमें संकटों से मुक्ति दिलाते हैं। जो भक्त अपने मन, शरीर, वचन और ध्यान को हनुमानजी में स्थिर करता है। यानी, जो भक्त अपना मन, शरीर, वचन और ध्यान हनुमानजी में लगाता है।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा॥

(भगवान राम हर की तपस्या के स्वामी हैं, और वे सभी लोगों के राजा हैं। तुम सभी कार्यों को सजाने वाले हो। यानी, तुम उन सबके कामों को पूरा करने में समर्थ हो।)

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै॥

(जो कोई भी और भी मनोरथ (इच्छाएँ या कामनाएँ) लाता है। वही अमित (अनंत) जीवन फल प्राप्त करता है। यानी, उसे अनंत काल तक की सुख-शांति और प्रसन्नता मिलती है।)

चारों युग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥

(तुम्हारा अपार पराक्रम चारों युगों में विख्यात है। यहाँ ‘चारों युग’ का अर्थ है अनादि काल से लेकर आज तक के समय तक के युग। जगत को तुम्हारा परसिद्ध (प्रसिद्ध) उजियारा (चमकदार दीपक) है। यानी, तुम्हारा प्रकाश पूरे जगत को प्रसन्नता और प्रकाश की ओर ले जाता है।)

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर-निकंदन राम दुलारे॥

(तुम साधु-संतों के रक्षक हो। यानी, तुम भक्तों की सुरक्षा करते हो। तुम असुरों का नाश करने वाले हो और रामचंद्रजी के प्रिय हो। यहाँ ‘असुर-निकंदन’ का अर्थ है राक्षसों को मारने वाला।)

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन्ह जानकी माता॥

(तुम सर्वशक्तिमान हो, जो अष्टसिद्धियों (आठ प्राप्तियों) और नौ निधियों (नौ धातुओं) के दाता हो। माता जानकी के लिए तुमने उन्हें बहुत से वरदान दिए हैं। यहाँ “अस बर” का अर्थ है “असीम” या “बहुत”।)

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सादा रहो रघुपति के दासा॥

(तुम्हारे पास भगवान राम के अमृत समान चिकित्सा विज्ञान है। हमेशा रघुपति (भगवान राम) के सेवक बने रहो। यहाँ “दासा” का अर्थ है सेवक।)

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥

(जो भक्ति तुम्हें करता है, वह भगवान राम को प्राप्त होता है। वह भक्त जन्म-जन्म के दुख को भूल जाता है। यानी, वह दुखों से मुक्ति प्राप्त कर लेता है।)

अंतकाल रघुबर पुरजाई।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥

(अंतकाल (अंतिम समय) में भगवान राम का सम्मान किया जाता है। वह स्थान जहाँ हरि के भक्त को जन्म लेने का स्थान कहा जाता है। यानी, भगवान के भक्त का जन्म सदैव उनके भजन और सेवा में होता है।)

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥

(अन्य देवताओं का मनुष्य का मन नहीं लगता। हनुमानजी ही सभी सुख का प्राप्त करने वाले हैं। उनके भक्ति और सेवा से सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं।)

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

(सभी संकटों का समाप्त हो जाता है और सभी पीड़ा मिट जाती है। जो कोई हनुमानजी का स्मरण करता है, वह हनुमानजी के बलवान (बलबीरा) स्वरूप की कृपा से।

जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

(जय हो, जय हो, जय हो हनुमान गोसाईं (सर्वोत्तम गुरु)। हे गुरुदेव, कृपा कीजिए। आपकी नाईं (नैन), अर्थात आपकी कृपा मुझ पर बरसाइए।)

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥

(जो कोई इस चालीसा का सत्रह बार पाठ करता है। उसके संकट बंधन (दुःखों का बंधन) टूट जाता है और वह अत्यंत महान सुख प्राप्त करता है।)

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

(जो व्यक्ति हनुमान चालीसा को पढ़ता है। उसे सिद्धि प्राप्त होती है। गौरीसा (गौरीशंकर) की कृपा होती है। यहाँ “साखी” का अर्थ है गवाह या साक्षी।)

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महं डेरा॥

(तुलसीदास हमेशा ही हरि (भगवान राम) का भक्त रहा है। हे नाथ, हे भगवान, कृपा कीजिए और हमारे हृदय में आवास स्थापित कीजिए। यहाँ “डेरा” का अर्थ है आवास।)

दोहा:
पवनतनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

(ओ मनुजकुल के नेता हनुमान, तुम संकटों को हरने वाले हो। तुम धर्म का अदर्श रूप हो, सभी के लिए मंगल करने वाले हो। तुम सदैव श्रीराम, लक्ष्मण, और सीता के साथ रहते हो। हे सुन्दर स्वरुप, तुम्हारा हृदय सब देवों के राजा, अर्थात ईश्वर ही रहता है।)

Hanuman Chalisa in Hindi PDF Download

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PDF NameHanuman Chalisa in Hindi
CategorySpiritual
Pages3
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FAQ

हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या होता है ?

हनुमान चालीसा का पाठ करने से अनेक लाभ होते हैं। यह मानसिक ताकत प्रदान करता है, संघर्षों को पार करने में सहायक होता है, और शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को संवारता है। यह शांति और आत्म-निर्भरता की भावना पैदा करता है, जो समग्र विकास की ओर मार्गदर्शन करता है।

हनुमान चालीसा कब पढ़े ?

हनुमान चालीसा को किसी भी समय पढ़ा जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को इसे पढ़ने का महत्व अधिक माना जाता है। अन्य धार्मिक उत्सवों या विशेष अवसरों पर भी इसे पढ़ा जा सकता है। यह व्यक्ति की आध्यात्मिक साधना में सहायक होता है और उन्हें मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।

हनुमान चालीसा pdf कैसे डाउनलोड करे ?

Hanuman Chalisa in Hindi pdf आपको HindiGyanBlog पर मिल जाएगा। यहाँ पर आप इसे पढ़ और डाउनलोड कर सकते है। इसके साथ आपको हनुमान चालीसा का पूर्ण अर्थ भी देखने को मिलेगा।

आज आपने क्या सीखा

हनुमान चालीसा एक अज्ञात स्थानिक महानता का प्रतीक है, जो अपनी गहन अर्थ और परिणामकारी शक्ति के लिए दुनिया भर में लाखों लोगों द्वारा पूजनीय है।

इसके छंद भक्ति, साहस और सहनशीलता की असली बातें समेटते हैं, जिन्हें प्रभु हनुमान ने अपने श्रद्धालु भक्तों के समक्ष प्रकट किया। इसके सुरों के माध्यम से, भक्तों को संघर्ष के समय में आराम, कमजोरी के क्षणों में बल और उनके आध्यात्मिक यात्रा पर मार्गदर्शन मिलता है।

इसके धार्मिक संदेश के अलावा, हनुमान चालीसा धर्म, विनम्रता और निःस्वार्थ सेवा के समान लक्षणों का प्रतीक है, जो विभिन्न परंपराओं और धारणाओं वाले व्यक्तियों के लिए प्रेरणास्पद होता है।

हम इसके उपदेशों को स्वीकार करते हुए और इसकी दिव्य छंदों में विलीन होते हुए, सभी धर्म के मार्ग पर चलते हुए, प्रभु हनुमान के अटल भक्ति और हनुमान चालीसा की अविनाशी ज्ञान से उदार बनें।

आशा करते है आपको आज का यह ब्लॉग पसंद आए। यदि आपको hanuman chalisa in hindi pdf से जुड़े कोई सवाल हो तो आप हमसे कमेंट में साझा करे धन्यवाद्।

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