100+ Kabir Ke Dohe in Hindi PDF with Meaning (कबीर के दोहे)

क्या आपको kabir das ji ke dohe पढ़ना पसंद है आज हम आपको कबीर के दोहे की चर्चा करेंगे। इसके साथ हम आपको kabir ke dohe in hindi pdf तथा उसके meaning भी बताएंगे।

चलिए अब अधिक समय ज़ाया ना करते हुए आज का यह ब्लॉग kabir ke dohe in hindi pdf सुरु करते है। सबसे पहले कबीर दास जी की जीवनी देखते है।

Kabir Das की कहानी

कबीर दास, जिन्हें आमतौर पर कबीर के नाम से जाना जाता है, 15वीं सदी के भारतीय कवि और संत थे। वे भारतीय साहित्य में सबसे प्रसिद्ध और मान्य कवियों में से एक हैं। कबीर की कविताएं धार्मिकता के सीमाओं को पार करती हैं और उन्होंने हिंदू, मुस्लिम और सूफी धर्म के सिद्धांतों को मिलाकर नया संगम बनाया।

कबीर का जन्म वराणसी में हुआ था। उनके जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी है, परंतु उन्होंने अपनी कविताओं में भगवान के एकता, प्रेम और धर्मिक अनुष्ठान के महत्व को उजागर किया।

कबीर की कविताएं बहुत ही सरल और सुन्दर हैं। उन्होंने अपने दोहों में जीवन के महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं, जैसे कि दुनिया की माया, असली भक्ति का महत्व, और ध्यान की जरूरत। उनकी कविताएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं और उनके द्वारा दिए गए संदेश समझने की प्रेरणा देती हैं।

चलिए अब kabir ke dohe with meaning in hindi pdf के और चलते है।

Kabir ke Dohe with Meaning in Hindi PDF

अब हम यहाँ kabir के कुछ प्रसिद्द दोहे के बारे में पढ़ेंगे। और आपको सभा दोहे का मतलब भी प्रदान करेंगे। इसके बाद आप kabir das ji ke dohe in hindi pdf डाउनलोड कर पाएंगे।

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।।

अर्थ: जब मैं दुनिया का दुर्भाग्य देखने निकला, तो कोई दुर्भाग्य मुझसे मिला नहीं। परंतु जब मैंने अपने अंतर्मन की खोज की, तो मैंने देखा कि मुझसे बदतर कोई नहीं है।

चाह मिले तो रहूँ परी, न मिले तो कूवरी।
यह बात बड़ी सखी, सब भांति की भीर।।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि अगर चाह हासिल हो तो मैं परी की तरह रहूँगा, और न हो तो मैं कूवरी (कवि) की तरह। यह सच्चाई है, इसे समझने वाली सखियाँ होंगी।

ज्ञानी के तिल में ज्ञानी, मूढ़ के तिल में न्यारा।
जैसे तिल में तेल है, माथे में विष विचारा।।

अर्थ: ज्ञानी के तिल में वह ज्ञानी है, जैसे कि तिल में तेल होता है। और मूर्ख के तिल में वह कुछ नहीं है, जैसे कि माथे में विष विचारा।

साईं इतना दीजिये, जामे कुटुम समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधू न भूखा जाय।।

अर्थ: हे साईं, इतना दीजिए कि मेरे परिवार का भी पेट भर जाए। मैं भी भूखा न रहूँ, और किसी साधू को भूखा न जाने दूं।

बिनु बोले बोलि लड़ाई, बिनु देखे मन की राई।
बिनु बाला छिन छिन मुख माहीं, गुरु ग्यान न समझाई।।

अर्थ: बिना बोले जब कोई लड़ाई करता है, और बिना देखे मन की बात करता है, तो उसके मुख में बाला छिन छिन होती है, क्योंकि गुरु कोई ज्ञान नहीं समझाता।

गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काको लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय।।

अर्थ: गुरु और भगवान दोनों खड़े हैं, लेकिन किसकी पूजा करनी चाहिए? कोई कहता है कि गुरु की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि गुरु ने ही हमें भगवान के बारे में बताया है।

जो तुम करो पसंद, तो जन जानीहै।
हरि को भजो तो तुम नर त्यागी।।

अर्थ: जो कुछ आपको पसंद है और आप करते हैं, उसे लोग जान लेते हैं। लेकिन अगर आप भगवान को पूजते हैं, तो आप मनुष्यता को त्यागते हैं।

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डारि, मन का मनका पेर।।

अर्थ: लोग जपते-तपते रहे युगों तक, लेकिन उनका मन नहीं बदलता। वह अपने कर्मों का मनका डालते हैं, लेकिन मन का मनका पीछे पड़ा रहता है।

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।

अर्थ: लोग पुस्तकें पढ़ते रहे और जग में मर गए, लेकिन कोई ज्ञानी नहीं बना। लेकिन जो भगवान के प्रेम की बातें पढ़ता है, वही सच्चा ज्ञानी है।

दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करें न कोय।
जो सुख में सुमिरन करें, दुख काहे को होय।।

अर्थ: सभी लोग दुख में भगवान का स्मरण करते हैं, परन्तु सुख में कोई नहीं करता। जो व्यक्ति सुख में भी भगवान का स्मरण करता है, उसे कभी भी दुःख नहीं होता।

राम नाम जपो जीवन सफल करोगे, दुख बिना कैसे सहोगे।
सुख में सिमरन सब कर लो, दुख में करो न कोय।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि अगर तुम राम का नाम जपोगे तो तुम्हारा जीवन सफल होगा, और तुम दुःख को कैसे सहोगे? सुख में सभी लोग ध्यान में रहते हैं, लेकिन दुःख में कोई नहीं करता।

ज्ञान बिनु न आनंद आवै, बिनु आनंद न पार।
बिनु गुरु के बाजे खड़क, बिनु बाजे बैजांतर।।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि ज्ञान के बिना कोई आनंद नहीं आता, और बिना आनंद के कोई सच्चा समाधान नहीं होता। बिना गुरु के किसी भी चीज की मान्यता नहीं होती, जैसे कि बाजे के बिना बैंजांतर की मान्यता नहीं होती।

साधो देखा संसार है, सब मैया मोहिया।
जो ज्ञानी हुआ, सो जगहां, मानुष तन में सोहिया।।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि साधुओं ने देखा है कि यह संसार सभी को माया में फंसा लेती है। जो व्यक्ति ज्ञानी हो जाता है, वही जानता है कि सारा जगहां सिर्फ मानव शरीर में ही है।

कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर।
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि वह बाजार में खड़ा है और सबकी खुशियां मांगता है। उसका किसी से दोस्ती नहीं है, और न बैर भी। वह सभी के लिए शुभकामनाएं मांगता है।

बूझी बूझी देखन मैं, बूझन न मांगो कोय।
बूझी बूझी जिय बहु, बूझी रहै लोय।।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि मैंने समझ लिया है और मुझसे समझने की कोई आवश्यकता नहीं है। जिसने समझ लिया है, वह बहुत खुश है और समझने में लगा रहता है।

Kabir Das की दिलचस्प कहानी

निचे हम आपको कबीर जी के कुछ रोचक जीवनी से जुडी बातो के बारे में बताते है।

जन्म से जुड़ा रहस्य: कबीर के जन्म के परिस्थितियों में एक रहस्य और परीकथाएँ हैं। उनके जन्म के बारे में विभिन्न कहानियाँ हैं, जिसमें एक कहती है कि वह एक कमल के पत्ते पर पानी में तैर रहे थे जिसे वाराणसी के एक तालाब में पाया गया था। दूसरी कथा कहती है कि उन्हें एक मुस्लिम बुनकर, निरु और उनकी पत्नी नीमा ने पाया और उन्हें अपने घर में पाला गया।

अन्तर्धर्मी परिवेश: कबीर का पालन कुछ अद्वितीय परिवेश में हुआ था जहाँ उन्हें हिंदू और मुस्लिम संस्कृति और परंपराओं का संघर्ष हुआ। उनका पालन उनके दर्शन और सिद्धांतों पर गहरा प्रभाव डाला, जो सभी धर्मों की एकता और ईश्वर की एकता को बताते हैं।

क्रांतिकारी कवि: कबीर एक क्रांतिकारी कवि थे जिन्होंने अपने समय के धार्मिक परंपराओं का सख्त विरोध किया। उन्होंने धार्मिक अनुष्ठानों, अंधविश्वासों और जाति प्रथा को खारिज किया। उनकी कविताएँ एक सीधा और व्यक्तिगत दैवी संबंध के लिए प्रशंसा करती हैं, न कि पुजारियों या धार्मिक संस्थानों पर निर्भरता।

ध्यानी और दार्शनिक: कबीर सिर्फ एक कवि नहीं थे बल्कि एक ध्यानी और दार्शनिक भी थे। उनकी पंक्तियाँ गहरे आध्यात्मिक दर्शन और जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में सत्य को छुपाती हैं।

विरासत: कबीर की विरासत उनकी कविताओं के माध्यम से जीवित है, जो आज भी भारत के विभिन्न हिस्सों में गाई और रची जाती हैं। उनके चौपाई और दोहे संगीत में रचे गए हैं और भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

आजीवन प्रेरणा: आज के समय में भी, कबीर के संदेश अभी भी लोगों के दिलों में गहराई से समाहित हो रहे हैं। उनकी कविताएँ मनुष्य के जीवन में प्रेरणा और एक ऊंचे दर्जे की चाहत को प्रकट करती हैं।

Kabir Ke Dohe in Hindi PDF

चलिए अब Kabir के कुछ अन्य Dohe पढ़ते है।

बूझी बूझी बिखिया, समझी ना दिन रात।
राम नाम बिना जग में, निरमल कोई नाह।।

अर्थ: यह कहना है कि बहुत से लोग हैं जो पढ़े-लिखे होते हैं, लेकिन उन्होंने समझा नहीं है कि दिन और रात में क्या हो रहा है। बिना भगवान के नाम के, कोई भी व्यक्ति जग में निर्मल नहीं है।

ज्ञानी जो जन हित करहिं, जे करहिं सो भल करहिं।
जे भल करहिं सो भल मानहु, करहिं कबीर भल जीत।।

अर्थ: जो व्यक्ति ज्ञानी है और लोगों की हितैषी सेवा करता है, वही अच्छा है। जो कुछ अच्छा करता है, उसे अच्छा माना जाता है। इस प्रकार जो कुछ कबीर ने किया है, उसे अच्छा जीत माना जाता है।

सुख में समरथ राजा, दुःख में प्रिय राजकुंवरी।
आप बिना कौन सहाय, बहुरि कृपा करहिं न जोरी।।

अर्थ: यह दोहा कहता है कि सुख के समय में सब कुछ सहज होता है, जैसे कि समर्थ राजा और प्रिय राजकुंवरी (रानी)। लेकिन दुःख के समय में ये सब कुछ नहीं मददगार होते, क्योंकि उनका जोर किसी काम में नहीं चलता।

बिगरी जो बनाये, बनाये जो बिगार।
जो कुछ है सो तुम्हारे, तुम कहे तो मैं तुम्हार।।

अर्थ: यह दोहा कहता है कि जो कुछ खराब हो गया है, उसे बनाने वाला भी हम ही हैं और जो कुछ अच्छा है, उसे बिगाड़ने वाला भी हम ही हैं। सब कुछ हमारा ही है, तो यदि हम कहें कि सब हमारा है, तो यह सही है।

जाके पास बहुतेरा, तिनका की बिजुली।
ज्यों काटे कठौ का निकसे, त्यों निकसे सिर निहारी।।

अर्थ: यह दोहा यह बताता है कि जिसके पास बहुत सम्पत्ति होती है, उसे उसका विचार भी बहुत उत्तेजित कर सकता है। जैसे कि कठौ के काटने पर सीधा निकल जाता है, वैसे ही धन के होने पर विचारों की प्रवृत्ति बदल सकती है।

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।

अर्थ: यह दोहा हमें सिखाता है कि सब कुछ धीरे-धीरे होता है। जैसे किसान बहुत सी पाध नुर्तुर करता है, फिर भी उसे फलों के उत्पन्न होने के लिए ऋतु का इंतजार करना पड़ता है। हमें धैर्य रखना चाहिए क्योंकि सफलता धीरे-धीरे ही आती है।

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो मन खोजा अपना, तो मुझसे बुरा न कोय।।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि जब वह बुराई को देखने के लिए चला था, तो कुछ भी बुरा नहीं मिला। लेकिन जब उन्होंने अपने मन की जांच की, तो उसमें भीरा नहीं मिला। यह बताता है कि हमें पहले अपने मन को समझना चाहिए, क्योंकि वह हमारे अधिकार में सबसे बड़ी बुराई हो सकता है।

जो तूको परहेज होय, तो साहे दुख होय।
दुख में सुमिरन सब करह, सुख में करह न कोय।।

अर्थ: यह दोहा हमें सिखाता है कि जब हम परहेज करते हैं, तो हमें दुख होता है। लेकिन दुख के समय में हमें भगवान का स्मरण करना चाहिए, लेकिन सुख के समय में हमें इसे नहीं भूलना चाहिए।

सांचा नाम अपना, भये छाछ सब कोय।
दुख में सुमिरन सब करह, सुख में करह न कोय।।

अर्थ: इस दोहे में कबीर कहते हैं कि एक व्यक्ति का नाम सांचा होना चाहिए, जिससे सबको विश्वास हो। दुख के समय में हमें भगवान का स्मरण करना चाहिए, लेकिन सुख के समय में हमें इसे नहीं भूलना चाहिए।

अच्छा करिए बुरा होय, बुरा करिए सुख।
राहु जैसे छाँव कुँवा, जैसे कूआ खाए खुक।।

अर्थ: यह दोहा हमें यह सिखाता है कि हमें अच्छा करना चाहिए, चाहे उससे कितना भी बुरा हो। और बुरा करना चाहिए जब हमें सुख मिले, क्योंकि वह बुराई हमें उसकी जानकारी देती है। यह जैसे है कि एक कूआ जैसे अच्छे जगह पर छाँव डालता है, और जैसे की वह अच्छे खाने के लिए छोटे कूआ में खुदाई करता है।

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Kabir Das Ji Ke Dohe in Hindi PDF Download

चलिए अब कबीर के दोहे का pdf प्रदान करते है। यह पीडीऍफ़ आपको निचे दिए गए टेबल पर link के रूप में मिल जाएगा। लिंक पर क्लिक करने के बाद आप यह pdf download कर सकते है।

PDF NameKabir Ke Dohe
Pages83
LanguageHindi
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FAQ

कबीर दास की जानकारी हिंदी में?

कबीर दास भारतीय संत और कवि थे। उनका जन्म लगभग 1440 ईसा पूर्व वाराणसी में हुआ था। उन्होंने अपने आत्मज्ञान और आत्म-साक्षात्कार से धार्मिक ज्ञान प्राप्त किया। उनकी कविताएँ सरलता और भावना से भरी होती थीं। उनके द्वारा विविध धार्मिक और सामाजिक संदेश प्रस्तुत किए गए। उनकी कविताएँ आज भी लोकप्रिय हैं और लोगों को भक्ति और सत्य की ओर प्रेरित करती हैं। वे एक महान संत और कवि के रूप में याद किए जाते हैं।

कबीर दास का जीवन परिचय 100 शब्दों में?

कबीर दास, 15वीं सदी के भारतीय संत और कवि थे। उनका जन्म लगभग 1440 ईसा पूर्व वाराणसी में हुआ था। उनके पिता नामदाता थे, और उनके बचपन में ही अद्भुत गुणों से विशिष्ट थे। कबीर ने धार्मिक संतुलन की महत्वपूर्णता को बताया और धार्मिक बंधनों का खंडन किया। उनकी कविताएँ आज भी प्रेरणा से भरी हुई हैं। कई कविताएँ उनके धार्मिक संदेशों, सामाजिक समस्याओं और जीवन के सामान्यतः प्रश्नों पर आधारित हैं। कबीर दास का योगदान हिन्दी साहित्य में अविस्मरणीय है, और उन्हें आज भी एक महान संत और कवि के रूप में याद किया जाता है।

कबीर क्यों प्रसिद्ध है?

कबीर दास को एक प्रेरणादायक संत और कवि के रूप में प्रसिद्ध किया जाता है। उनकी कविताएँ धर्म, समाज और जीवन के विविध पहलुओं पर आधारित हैं जो आज भी हमारे जीवन में महत्वपूर्ण हैं। उनके दोहे और गीतों में सरलता और भावनाएं हैं जो लोगों को प्रेरित करती हैं। कबीर दास ने जातिवाद, धर्मान्धता, असामाजिकता आदि के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई और समाज में सुधार लाने की प्रेरणा दी। उनकी कला और उनके विचार आज भी हमें एक सच्चे और उदार जीवन की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं। इसी कारण से वे एक संत-कवि के रूप में नहीं सिर्फ भारतीय समाज में बल्कि पूरे विश्व में महत्वपूर्ण हैं।

आज आपने क्या सीखा

कबीर के दोहे हमारे दिलों में समाहित अमूल्य संदेशों और गहरे उपदेशों को सजीव रूप से छू जाते हैं। प्रसिद्ध संत-कवि कबीर दास ने हमें उनके छंदों के माध्यम से सिखाया कि कैसे हमें जीवन में सही दिशा मिल सकती है।

उनके सरल और अर्थपूर्ण दोहे हमें आत्म-जागरूकता, सत्य की खोज, और समरसता के महत्व को समझाते हैं। कबीर के दोहे आज भी हमारे जीवन में महत्वपूर्ण हैं और हमें मानवता, करुणा, और न्याय के मूल्यों को याद दिलाते हैं।

जब हम कबीर की पंक्तियों को समझते हैं, तो हम अपने आत्म-विकास के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित होते हैं। चलिए, आओ हम इन अनमोल दोहों के गहरे संदेश को समझें और उन्हें अपने जीवन में उतारें।

तो आशा करते है आपको आज का यह ब्लॉग kabir ke dohe with meaning in hindi pdf पढ़कर अच्छा लगा हो यदि आपको यह kabir ke dohe in hindi pdf download करने में कोई परेशानी आए तो हमसे कमेंट में साझा करे।

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